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Dowry !! An Emotional Story

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Dahaj
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दिल्ली में एक सपन्न  व्यापारी बलराज  अपनी पत्नी पुस्पा  तथा अपने दो बेटो के साथ रहते थे, उनके दोनों बेटे बहुत ही होनहार थे, बड़े का नाम  रमेश व् छोटे का नाम राहुल था। रमेश  का कालेज पूरा होने पर उसने अपने पापा का बिजनेस ज्वाइन कर लिया।  रमेश कालेज से ही निशा को पसंद करइ, ता था , जब शादी की बात चली तो रमेश ने निशा के बारे में घरमे सभी को बता दिया, पहले तो सब अपसेट हुए क्योकि निशा का परिवार उनके बराबरी का नहीं था, लेकिन रमेश की जिद के आगे सब मान गए , निशा की फॅमिली  की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए बहुत ही सादगी से रमेश और निशा की शादी हुई, शादी के बाद निशा अपनी ससुराल आ गई, उसके बाद सेठ बलराज ने एक बहुत शानदार पार्टी   दी, जिसमे  शहर  की अभी अमीर हस्तिया शामिल  हुई, सभी ने पार्टी की तारीफ की और निशा की फॅमिली के बारे में पुछा,  कुछ ने तो दहेज़ के बारे में पूछा , की दहेज़ कितना  लिया , घर परिवार तो बराबरी का है, और बहुत सारी बातें, तरह -तरह के बातें हो रही थी।

दिन बीतते गए , निशा ने भरपूर कोशिस की  परिवार का दिल जीतने का, सुबह सबसे पहले उठती, फिर सबके पसंद का नास्ता बनाती सबकी पसंद का लंच बनाती, डिनर बनाती, धार को सजाती। सभी का ख्याल रखती, अपनी सास कीसेवा भी करती, पर वह सफल  नहीं हो पाई , क्योकि सास -ससुर दोनों के दिमाक में पूरी तरह यह बात घर कर गई तह कि यह छोटे  घर कि लड़की है ये हमारी बहू नहीं हो सकती, वह रमेश कि पत्नी तो बन गई पर घर की बहू नहीं बन पाई, यह उदास रहती, उसकी यहच उदासी रमेश से भी छिपी नहीं थी,  पर वह कुछ  नहीं बोल सकता था, अगर वह बोलता तो उसे जोरू का गुलाम कहलाता, समय बीतता गया पर पुस्पा जी के ताने काम नहीं हुए , कोई भी मौका न छोड़ती वो निशा को ताने मरने का, रमेश भी परेशान हो चूका  था, तभी बलराज ने अपने बिजनेस कि एक ब्रांच मुंबई  में डाली, आप उस ब्रांच को सँभालने के लिए किसी को तो जाना था, इसलिए रमेश ने खुद जाने का मन बना लिया, उसने सोचा  निशा को परिवार का प्यार तो दिला  न सका , कम से कम तानो से तो बचा सकता है, इसलिए वह निशा के साथ मुंबई चला गया, आप तो दिल्ली कामइ  ही आना  होता .

समय बीतता गया राहुल का भी कालेज पूरा हो गया, उसने भी खानदानी बिजनेस ज्वॉइन  कर लिया, आप उसके लिए भी रिश्ते देखे  जाने लगे। तभी दिल्ली के ही इस मशहूर बिजनेस मैन कि बेटी सोनिया का रिश्ता आया, रिश्ता बराबरी का था, सोनिया उनकी एकलौती बेटी थी, रिश्ता पक्का हो गया, बहुत ही धूम-धाम से दोनों कि शादी हुए, शादी में दिल्ली, मुंबई,  से बहुत सारी जानी मानी हस्तिया आयी, सब बहुत खुश थे, कीमती सामान से घर भरा हुआ था, बहुत सारे गहने  भी आये थे , पुस्पा जी सबको बता रही थी राहुल के ससुराल वाले बहुत धनी  लोग है, उन्होंने बहुत सारा सामान, गहने और कैश दिया है, तभी किसी ने कहा है पुस्पा जी राहुल कि ससुराल वालो ने तो आपका घर भर दिया, रमेश कि शादी में तो कुछ भी नहीं आया, तब पुस्पा जी ने बोला , एक बार  खोटा सिक्का आ  गया भगवान् हर बार थोड़ी देगा, उनकी इस बात से निशा को बहुत दुःख हुआ, पर वह कुछ नहीं कह सकी, शादी कि रश्मो ले बाद रमेश और निशा वापस मुंबई चले गए,

शादी के कुछ दिन तक सोनिया ससुराल में रही , वह ९ बज सो कर उठती, कॉफी  बेड रूम में ही मागवती, सबके ऑफिस चले जाने के बाद थोड़ी देर के लिए बहार  आती ब्रेकफास्ट करती,  लंच में क्या खाना  है, पुष्पा जी को बताती  फिर रूम बे बंद हो जाती , अक्सर लंच करके घूमने निकल जाती, और रात को लत आती, पुस्पा जी के घर में किसी चीज के कमी नहीं थी, लकिन वो बहुत ही परपरा  वादी थी, नई बहू का इसतरह  का व्यव्हार उनसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, उन्होंने सोनिया से बात करने से पहले राहुल से बात करना उचित समझा, राहुल से जब सोनिया के व्यव्हार के बारे में बात की, राहुल बहुत शांति से सुनता रहा, फिर बोला आप मुझसे सोनिया के बारे में क्यों बात कर रहे है, सोनिया को आपने पसंद किया  इस घर की बहू के लिए मैंने नहीं, अच्छा घर है, अमीर घर की लड़की है, दहेज़ भी खूब मिला है, अब क्या प्रॉब्लम  है.

आपके अनुसार शादी के लिए यही तो चाहिए था, इसके अलावा सब कुछ तो निशा भाभी में था ही, वह दहेज़ नहीं लाई थी, बस इसीलिए तो पसंद नहीं थी, अब दहेज़ वाली बहू आयी है, आपसे ज्यादा धनी सोनिया के फादर है आप उसको कुछ नहीं बोल सकते, अब तो समझ जाइये, पैसा ही सबकुछ नहीं होता, संस्कार भी बहुत कुछ होता है, निशा भाभी संस्कारो की धनी है, आप उन्हे  और भैया को घर बुलवालो।

 राहुल की बात सुनकर बलराज और पुस्पा को अपनी की गई गलती पर पछतावा था, वह निशा के साथ किये गए  व्यव्हार के लिए शर्मिंदा थे,उन्होंने रमेश को फ़ोन करके अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी।, पुस्पा जी ने कहा मेरी बड़ी बहू को लेकर  घर आ जाओ, लक्ष्मी है मेरी बहू। निशा की आँखों भी ख़ुशी से नम  दी।

हर इंसान को इंसान की क़्वालिटी  की कदर  करनी  चाहिए, पैसे  या  घर खानदान क्या है के बुनियाद पर फैसला नहीं करना चाहिए, सबको सम्मान पाने का अधिकार है।

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