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निशा अभी ऑफिस से घर पहुंची ही थी कि उसकी सास ने बड़ी बहु को आवाज लगाई, किरण देखो निशा बहू ऑफिस से आ गई है इसके लिए चाय बना दो, निशा को यह बिलकुल भी पसंद न था कि माँ जी जिठानी जी को उसकी सेवा के लिए बोले, वैसे तो किरण और निशा दोनों ही घर की बहुये थी, किरण घर में रहती थी और निशा ऑफिस जाती थी वह मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर थी उसका और नितिन का प्रेम विवाह था, दोनों एक ही ऑफिस में काम करते थे , सीधे शब्दों में कहे तो निशा कमाने वाली बहु थी इसलिए सास उसे बहुत मान देती, और किरण उन्हें एक आंख न सुहाती, सरला जी (किरण व् निशा की सास ) कोई मौका न छोड़ती उसे सुनाने का, पर वह अपने पति जतिन से कभी कुछ भी न कहती वह चुपचाप सुनकर रो लेती , जतिन भी एक मल्टीनेशनल कंपनी में software Engineer है.

किरण चाय बनाकर ले आई, निशा ने पुछा भाभी आपकी चाय कहा है, मै किचेन में ही पी लूंगी सब्जी बन रही है उसे भी देख लूंगी, सब्जी बनाकर किरण सौर्यै को पढ़ाने बैठ गई, सोर्य किरण का १२ साल का बेटा है जो 7th class में पड़ता है, अभी कुछ दिन पहले भाभी ने सौर्य की मैथ की टूशन लगाने के लिए कहा, तो सरला जी ने घर सर पर उठ लिया , इसी लिए कहा था पड़ी लिखी बहु लाओ, कम से कम बच्चो को तो पड़ा लेती नितिन ने समझाया माँ भाभी हिस्ट्री में ऍम ऐ है, बस मैथ उनका सब्जेक्ट नहीं है, और अब पढ़ाई बहुत बदल गई है, पर सरला जी कहा मानने वाली थी , तो सौर्य की टूशन नहीं लगी, किरण ही पढ़ाती है, निशा किचेन में गई दो कप बढ़िया अदरक वाली चाय बनाई और किरण के कमरे में ले आयी, और बोली चलिए भाभी आराम से चाय पीते है, अरे तुमने क्यों बनाई मुझे बोल दिया होता मै बना देती, किरण घबराकर बोली , कोई नहीं भाभी मैंने बना ली तो क्या हो गया, कही मां जी को पता चल गए की चाय तुमने बनाई है तो पता नहीं मुझे कितना सुनाएंगी , छोड़िये ना भाभी चाय के मजे लीजिये, निशा ने मुस्कराकर कहा,दोनों चाय पीने लगे, अचानक निशा बोली भाभी क्या कभी आपकी कोई hobbey नहीं रही, कुछ ऐसा काम जो करके आपको मजा आता हो, ऐसा तो कुछ नहीं है किरण बोली, लकिन एक काम है जो मै किया करती थी, माँ की पुरानी साडी से अपने लिए खूब सारी ड्रेस बनाया करती थी, उन पर लैस व् मोती इत्यादि लगाती और जब उन ड्रेस को पहन कर कालेज जाती तो सारी लड़किया मुझसे बुटीक का नाम पूछती , और ड्रेस की खूब तारीफ करती, और फिर शादी हो गई, उसके बाद तो समय ही नहीं मिला । दोनों ने चाय ख़त्म की, किरण डिनर की तयारी में लग गई।


अगले दिन निशा जब ऑफिस से आयी तो सीधा किरण के कमरे में आयी और एक पैकेट किरण को पड़गा दिया और बोली, भाभी इसमें कुछ कपडे लैस सलमा सितारा, मोती इत्यादि है मशीन तो आपके पास है ही किसी और चीज की जरूरत हो तो मुझे बता देना मै कल ऑफिस से आते हुए ले आउंगी, निशा ये सब क्या है मेरे पास इतना टाइम कहा है की मै ये सब कर सकू, टाइम की चिंता आप मत करिये , सौर्य को इंग्लिश और मैथ नितिन पढ़ाएंगे , डिनर मै बनाउंगी, आप शुरुआत तो कीजिये सब मुस्किले आसान हो जायँगी, निशा भी अपनी जिदकी पक्की थी उसे किरण को मान सम्मान दिलाना था, और वह आत्म निर्भरता से ही मिलेगा यह वह समझ चुकी थी, इसलिए उसने किरण की एक न सुनी, किरण ने उसकी बात मान ली.


अगले दिन किरण को जैसे ही टाइम मिला किरण ने गूगल पर कुछ डिजाइन देखी और एक गाउन बनाने की सोची 2 दिन की मेहनत के बाद किरण ने एक बहुत सूंदर ड्रेस तैयार की उसे उसने निशा को दिखाया, निशा आश्चर्य चकित रह गई और बोली भाभी आपके हाथो में तो जादू है, वह उस ड्रेस को अपने साथ ऑफिस लगाई, और अपने सहकर्मियों को दिखाया और सबको बताया मेरी भाभी बनाती है अगर किसी को चहिये तो बताना, उस गाउन के लिए उसे 5 आर्डर मिल गए, सबके कलर उनकी पसंद के थे ,एक सहकर्मी ने तो वही गाउन खरीद लिया, उसदिन शाम को निशा ने सबके बताये कलर के कपडे और सामान ले जा कर किरण को दिया, और बोली बधाई हो भाभी गाउन के आर्डर मिला है, ये लीजिये उसका सामान और ये उनके नंबर है जिनके लिए आपको गाउन बनाने है,किरण की आंखे भर आयी और बोली किन शब्दों में तुम्हारा धन्यवाद कहुँ, और पहले सामान के पैसे भी नहीं दे पाई मै तुम्हे, और दुबारा सामान ले आई तुम, मैंने अपने पहले वाले सामान के भी पैसे ले लिए है है और ये सारा सामान आपके पैसो का है , किरण हैरत भरी निगाहो से निशा को देखने लगी, आप मुझे ऐसे मत देखिये निशा ने शरारती अंदाज में कहा,सच में ये आपके ही पैसे है, जो गाउन आपने बनाया था वो में कंपनी की मार्केटिंग हेड को बहुत पसंद आया और उन्होंने उसे ७ हजार में खरीद लिए, उन्ही पैसो से ये सामान लेकर आई हूँ, आप अब बस काम पर फोकस करिये , किरण ने सभी कस्टमर से बात की उनकी पसंद के अनुसार ड्रेस तैयार की और निशा से भेज दिया.

निशा जब ऑफिस से वापस आयी और बोली भाभी आप यहाँ आइये, उसको किचेन का काम करने दो सरला जी ने बीच में ही टोक दिया, निशा सरला जी को अनसुनी करके भाभी को बुलाती रही, जब किरण आई तो उसको हाथ पकड़ कर बिठा लिया, और 25000 हजार किरण को देते हुए बोली भाभी ये आपकी पहली कमाई है, सरला जी को कुछ समझ नहीं आया, तब निशा ने बताया भाभी को कपड़ो को disign करने का शौक है, उसी की वजह से कुछ लोगे के कपडे बनाये ये उसी के पैसे है, किरण ने पैसे सरला जी को दे दिए, मंदिर में रख दो , भगवान् तुम्हे तरक्की दे, अब तो किरण का कॉन्फिडेंस बाद गया, घर के काम के लिए मेड रख ली, वह व्हाट्सप ग्रुप बनाकर अपने disign शेयर करने लगी देखते ही देखते उसके कपड़ो की डिमांड बढ़ने लगी, उसने काम वालियों की लड़कियों को काम पर रख लिया उन्हें वह काम सिखाती और उनसे करवाती, नितिन और निशा ने कई बार उसके एक्जीवेसन भी लगवाए, उसके बाद तो उसके काम की डिमांड और बढ़ने लगी, कुछ दिनों के बाद उसने अपना बुटीक खोल लिया। बुटीक का रिबन उसने अपनी सासु माँ से कटवाया, सरला जी किरण को गले लगा कर बोली मुझे माफ़ कर दो बहू,मैंने तुम्हे कोयला समझ तुम्हे कितने ताने दिए, तुम तो हीरा हो हीरा । माँ जी मै अकेले कुछ भी न कर पाती, भगवान् ने मुझे बहने नहीं दी थी, निशा ने वो कमी पूरी कर दी ,निशा के बिना मै इतना बड़ा कदम कभी नहीं उठा पाती , उसका जितना शुक्रिया करू उतना काम है.


शायद यहाँ मेरी तारीफ हो रही है, अंदर आते हुए निशा ने हसकर कहा, सरला जी ने दोनों को गले लगा लिया मै बहुत किस्मत वाली की मेरी बहुओ की बीच में इतना प्यार है, और मेरे दोनों बहुये आत्मनिर्भर है ।


आत्म निर्भर होना अति आवश्यक है, इस कहानी को पढ़कर किसी एक भी दोस्त ने अपनी रूचि को पहचान कर उसे आत्मनिर्भर बनने का साधन बना लिया तो मै समझूंगी इस लेख का उद्देश्य पूरा हुआ।आशा है कहानी आपको आपको पसंद आई होगी, अपने भाव कमेंट करके अवश्य बताइयेगा।

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