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बहू बेटी

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Bahu-Beti
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गोविन्द दास की हवेली की चर्चा पूरे इलाहाबाद में थी, बहुत हु भव्य व् सूंदर थी सुमित्रा हवेली को बहुत ही सलीके से सजाया गया था। गोविन्द दास ने अपनी पत्नी सुमित्रा देवी के नाम पर हवेली का नाम सुमित्रा हवेली रखा था,गोविन्द दास के स्वर्ग सिधारने के बाद  सुमित्रा देवी ने बहुत अच्छे से संभल रखा था सब कुछ, हवेली आज भी उतनी सूंदर उतनी ही भव्य थी. बहू बेटी #EmotionalStory

सुमित्रा जी के दो बच्चे थे, केशव, आरती, दोनों  की शादी हो गई थी, केशव  बड़ा था वह अपनी पत्नी व् एक बेटे , एक बेटी के साथ हवेली में रहते है, बेटी का विवाह इलाहाबाद में ही एक संपन्न परिवार में हुआ है, हवेली में सर सुमित्रा देवी का राज चलता है, केशव जी ने आज तक ऊँची आवाज  में अपनी माँ से बात नहीं की, केशव का बेटा जो की अब बड़ा हो रहा है, अपनी मर्जी के करनी की कोशिश की मगर सुमित्रा देवी के आगे झुकना पड़ा। #emotionalStory

आरती की ससुराल पास में होने की वजह से वह महीने में ३-४  बार तो आ जाती है , उसको देखकर सुमित्रा देवी बहुत खुश हो जाती, और सरला बहू  को आदेश हो जाता पकवान बनाने का, सुबह से पकवान बनने लगते, सरला पूरा दिन किचन में रहती, पकवान की खुसबू  पूरी हवेली में फैल जाती  लेकिन उससे कोई भी न पूछता खाने के लिए, और चार खरी खोटी सुना देती उसे, मेरी बेटी का आना तुमको नहीं भाता, कई बार तो केशव ने सरला का पक्ष लेने की कोशिस की पर माँ के आगे एक न चली, सरला के बच्चे जो अब बड़े हो रहे थे उन्हें भी दादी द्वारा माँ का अपमान करना बिलकुल अच्छा नहीं लगता. #hindistory

समय बीतता गया, एक दिन सरला सो कर बहार आयी  , बरामदे में सुमित्रा देवी, को न देख  कर अचम्भा हुआ क्योकि सुबह होते ही बारमदे में बैठ जाती ,और जब सरला बाहर आती तो उसको खरी खोटी सुनाती, यह उनका रोज का  था, आज वह बरामदे में न थी, इसलिए सरला चकित थी, वह उनके रूम में गई, जहा सुमित्रा देवी बेहोश पड़ी थी, सरला चिल्लाई तो केशव और बच्चे भी रूम में आ गए , उन्होंने तुरंत डॉक्टर को फ़ोन किया, डॉटर ने चेक करके बताया  की उनको लकवा मार  गया है, बाया  भाग काम नहीं कर रहा, लेकिन आवाज उतनी ही बुलंद जैसे कुछ   हुआ ही  न हो, खबर  पाकर बेटी  आ गई, बेटी को देख कर सुमित्रा देवी मन ही मन बहुत खुश हुई, सरला को हुकुम सुना दिया गया की खूब अच्छा खाना बनाये , सरला का  तो काम कर कर के बुरा हाल था, घर का काम सासु माँ के काम क्योकि सुमित्रा देवी तो अब हिल भी नहीं सकती थी, उसके बाद अब ननद के आने से उसका काम और ज्यादा हो  गया था। #HearttouchingStory

एक दिन आरती माँ के पास बैठी थी, तभी सुमित्रा देवी ने कहा, लगता है, मेरा डाइपर भर गया है, बहु सामान लेने बाहर गई है, आने में टाइम लगेगा तू बदल दे, इतने में आरती तपाक से बोली, भाभी आएँगी  तभी करेंगी,, मुझसे  ये गन्दगी साफ  नहीं होगी, जिस बेटी पर इतना अभिमान  था,  उसने उनका एक बार डाइपर बदलने से मना  कर दिया  एक सरला है जिससे कभी सीधे मुँह बात नहीं की फिर भी मेरा कितना ख्याल करती है, यह सोच कर उनकी आंखे नम हो गई, तभी आरती की सास का फ़ोन आया तो आरती फ़ोन पर कहने लगी नहीं मैं अभी नहीं आ सकती, आपको तो पता है माँ का क्या हाल है, उनका ध्यान  रखने के लिए कोई तो होना चाहिए। सुमित्रा देवी मन ही मन सोचने लगी मेरा ख्याल क्या रखेगी, खुद के लिए एक कप चाय तक तो बनाती नहीं है,  तभी सरला मार्किट से आ गई, सुमित्रा देवी ने आवाज लगाई बहू, बहू , तो आरती चिल्लाते हुए बोली भाभी भाभी, आपको सुनाई नहीं देता माँ कितनी देर से आवाज लगा रही है, उनक डाइपर भर गया है।

सरला ने डाइपर बदला, उसके बाद सुमित्रा देवी ने सरला से बहुत प्यार से बोला बहू अपनी ननद का सामान पैक कर दो  वह आज ही आपने ससुराल जाएगी, उसकी अपनी गृहस्थी है, लेकिन माँ आपको इस हाल  में छोड़ कर कैसे जाऊ आरती न कहा। तुम मेरी चिंता मत करो मेरी  बहू  मुझे संभल लेगी, उनकी आँखों में सरला के प्रति अथाह प्यार झलक रहा था। इस समय आरती ने कुछ न बोलने में ही अपनी भलाई समझी। #Daughterinlaw

सुमित्रा देवी  का व्यव्हार हमेश के लिए सरला के लिए बदल गयाऔर वो समझ चुकी थी की सरला उनके लिए कितनी महत्वपूर्ण है. माँ का बदला मिजाज देखकर केशब को भी शुकून आया. आखिर सरला की तपस्या रंग लाई।

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