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दर्द का रिस्ता!! Emotional Story in Hindi

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Sroty
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दिवाली की छुट्टियों में सभी लड़किया घर जा चुकी थी, सिर्फ निशा ही हॉस्टल में बची थी,हॉस्टल की मालकिन रतना  ने निशा को देखकर बोला अरे निशा तुम घर नहीं गई, दिवाली पर तो सभी ऑफिस  बंद होते है, निशा ने टालते हुए बोला ऐसी ही मन नहीं किया, आंटी अगर मेस बंद हो गया है तो कोई बात नहीं मै खाना बहार से खा लूंगी, और एक हफ्ते में तो सब लड़किया आ ही जायँगी,आप चिंता मत कीजिये  निशा ने बुझे मन से बात ख़तम करने की कोशिस की.

मगर निशा का उदास चेहरा देख कर  रतना भाप गई, की कोई बात तो जरूर है, जिस ने इसे इतने बड़े त्यौहार पर घर जाने से रोक लिया, रतना बोली बेटा साथ रहते -रहते हम एक परिवार की तरह ही हो गए है , मेस बांधो गया तो क्या हुआ  मैं अपने लिए तो खाना बनाउंगी ही, तुम भी खा लेना, और अब मुझे भी तुम सब के साथ खाना खाने की आदत हो गई है, अकेले खाना खाना अब मुझे भी अच्छा नहीं लगेगा, इस लिए हम साथ ही खाना खायेगे, मैं तुम्हारी माँ की तरह हू अगर तुम ठीक समझो तो अपने उदासी का कारन मुझे बता सकते हो , दुख बाटने से काम होता है, रतना निशा के सर पर हाथ फेरनी लगी, निशा को बहुत ही अपनेपन का एहसास हुआ, उसके आँशु बहने लगे।

निशा रोते हुए अपनी कहानी रतना को बताने लगी, मेरी माँ  मुझे पैदा करते ही अकेला छोड़ कर चल बसी, मेरे नाना -नानी ने मेरे पापा का विवाह मेरी मौसी से करा दिया, उनका मानना था की बहन की बेटी को उनसे अच्छा प्यार कोई नहीं दे सकता , पापा ने भी यही सोच कर शादी के लिया हां कर दी, मेरी मौसी ही मेरी सौतेली माँ है, घर पर रहती हू तो वह मुझे कोसने का कोई मौका नहीं छोड़ती कहती है की मैंने पैदा होते ही माँ को खा लिया, यदि ऐसा नहीं होता तो उनको मुझे पालने के लिए अपनी बड़ी बहन को जगह नहीं लेनी पड़ती, और वह अपना सारा गुस्सा मुझपर निकलती है,

आप बताइये मैं अपनी माँ की मृत्यु का कारन कैसे हो सकती हू,? इसमें मेरा क्या दोष है, यदि उनका विवाह मेरे पापा से हुआ तो इसमें मेरी क्या गलती है, इसलिए पापा ने मुझे हॉस्टल में रखकर पढ़ाया , ताकि मुझे मौसी के ताने न सुनने पड़े, जब पापा का मन होता है, वह मुझसे मिलने आ जाते है,

रतना ने उसे गले से लगा लिया,औरबोली  रोते  नहीं है, तुम एक बहादुर बच्ची हो, मै तुम्हारा दुःख समाज सकती हूँ, क्योकि मेरी भी माँ मुझे जन्म देते ही चल बसी, मेरे पापा ने दूसरी शादी कर ली, सौतेली माँ ने जीना नर्क कार दिया, घर में नई माँ की चलती थी इस लिए अधेड़ उम्र के इंसान के साथ मेरा विवाह करा दिया, शादी के कुछ वैर्षो बाद मेरे पति का भी देहांत हो गया, तबसे अकेली हूँ, तुम्हारी तरह मै भी सच्चे प्यार को तरसी हू बेटी, आज से तुम मेरी बेटी हो और मै तुम्हारी माँ, तुम्हे कभी भी किसी बात की कमी नहीं होने दूंगी, ऐसा कह कर रतना निशा से लिपट गई, दोनों न जाने कितनी देर तक रोते रहे, दोने का एक ही रिश्ता था दर्द का रिश्ता।

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