Home Story तुम मेरी आँखों के सामने रहना !!

तुम मेरी आँखों के सामने रहना !!

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emotional Story

निशा  एक  पढ़ी – लिखी, सूंदर  लड़की  थी, वह  जॉब  कर्ती  थी. स्वाभाव  बहुत  ही  सरल  था, उसकी   जिंदगी  में  करियर  बहुत  इम्पोर्टेन्ट  था लेकिन  उसकी   शादी  रमेश  के  साथ  हु , जो  एक  जॉइंट  फॅमिली  में  रहता  था , जब  निशा  दुल्हन  बनकर  ससुराल  आयी  तो  बाकि  लड़कियों  की  तरह  उसके  भी  सपने  थे , लकिन  ससुराल  पहुंच  कर  सरे  सपने  चकनाचूर  हो  गए  क्योकि   वह  एक  रूढ़िवादी फॅमिली  थी , जहा  घर  में  नई बहु के आते ही सारे घर की काम की जिम्मेदारी  उसी को सौंप दी जाती थी, बड़ी बही बहुत खुश थी क्योकि अब छोटी बहु की आने से उसको काम से रहत मिलने वाली थी, अब निशा को घर की पूरी जिम्मेदारी दे दी गई,वह सुबह  सबसे पहले उठकर सबके लिए चाय बनातीं, सबको चाय देती , फिर सबसे पूछकर सबके लिए उनके पसंद का नास्ता बनातीं, फिर वह लंच की तैयारी में लग जाती, रमेश की काफी रिस्तेदार भी शामे सिटी में रहते थे , वह लोग भी खूब आते -जाते रहते ।निशा का पूरा दिन किचन और घर संभालने में ही निकल जाता.

एक दिन उसने हिम्मत करके रमेश से जॉब की लिए पूछा, तो रमेश नेकहा मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, पर माँ -पिता जी से पूछ लो, निशा ने जब सासु माँ से पुछा तो वह गुस्से में आ गई।सासु माँ ने जब जॉब की बात सुनी तो गुस्से में आगई और  बोली हम अब बहू की कमाई खाएंगे क्या, घर की बहू  जॉब नहीं कारगी, निशा को बहुत बुरा लगा लकिन क्या करसकती थी, चुप हो गई, , समय बीतता गया , निशा एक बेटे की माँ बन गई, बेटे की जिम्मेदारी और खर की कामो में वह उलझ की रह गई, इसी बीच रमेश  का ट्रॉंसफर दुसरे शहर हो गया, नए शहर में निशा ने रमेश से जॉब की बात की तो रमेश ने कहा हमारा बेटा अभी छोटा है, जब यह 5 साल का हो जाये तब जॉब करलेना, निशा को जैसे नई जिंदगी मिल गई हो, उसने  बहुत  अच्छे से अपने बच्चे की परवरिश की, अब उसका बेटा 5 साल का था।

अब निशा बहुत खुश थी , उसने इंटरव्यू देना स्टार्ट कर दिया, उसको एक अच्छी जॉब मिल गई, आज वह बहुत खुश थी, उसका वर्षो पुराना सपना पूरा होने जा रहा था।

 निशा रमेश की आने का इन्तजार कर रही थी, तभी डोर   बेल बजी , निशा ने डोर ओपन किया , रमेश अंदर आये , दोनों ने खाना खाया, अब निशा ने अपनी जॉब की बारे में बताया। निशा की बात सुनकर रमेश बोले, ” मुझे तुम्हारे जॉब करने से कोई प्रॉब्लम नहीं है, पर मई चाहता हु की तुम मेरी आँखों की सामने रहो। तुम   बस मेरे लिए तैयार हो,तुम मेरा घर सम्भालो , मेरे बच्चे को सम्भालो, तुम सिर्फमेरी हो।

निशा का मन किया की वह बोल दे वह भी इंसान है, उसके भी सपने है, वह किसी की प्रॉपर्टी नहीं है, वह भी इंसान है, जिसको अपनी जिंदगी अपनी तरह जीने का पूरा हक़ है, पर वह बोल न सकी, रोते- रोते कब सो गई उसे पता ही न चला।

 क्या निशा की साथ सही हुआ, क्या एक लड़की को सपना पूरा करने का हक़ नहीं है, क्यों शादी की बाद सर्फ लड़कियों की ही क़ुरबानी देनी पड़ती है,ये रमेश का कैसा प्यार  है जो  ये ना जान सका की उसकी पत्नी की खुसी किस्मे में है, या जानबूझ केर जानना नहीं चाहा। २१वी शताब्दी में भी न जाने कितनी निशा अपना सपना अपना करियर पति, परिवार & समाज की लिए कुर्बान कर देती है, ओर किसी को कोई फर्क भी नहीं पड़ता ।

Dear reader,  comment  में  लिखकर  जरूर बताये  की  क्या  यह  सही  है , अगर  नहीं तो  क्या  solution हो  सकते  है ।, आपका  कमेंट  किसी  की  लाइफ  बदल  सकता    है ।

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