Home Story कहा से छेडू फ़साना !!Story in Hindi

कहा से छेडू फ़साना !!Story in Hindi

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इस खुश्ख़बरी ने आज की सुबह को बहुत खूबसूरत बना दिया था , पापा आज बहुत खुश थे और गर्वान्वित थे । सुबह से बधाईया बटोर रहे थे, बधाईया बटोरते हुए उन्हें  पारुल के लिए गर्व की अनुभूति हो रही थी, मैं खुश भी थी और थोड़ी जलन भी हो रही थी.

आज सुबह से ही बधाई देने वालो का ताँता घर में लगा हुआ था, मीडिया वाले भी आये थे, बात ही कुछ ऐसी थी, मेरी बहन  का आज रिजल्ट आया था, वह मजिस्ट्रेट बन गई थी, पापा ख़ुशी से फूले नहीं समां रहे थे, मां भी बहुत खुश थी, सभी को बता रही थी , मेरी पारुल मेरी निशा की परछाई है, मैंने घूर कर माँ को देखा , वह हसने लगी,  हम दोनों बिलकुल एक जैसे नहीं थे , मैं बचपन सेी ही शांत थी वह  बचपन से ही नटखट ही थी, ‘वह शरारत  करती, और माँ – पापा जब पूछते किसने किया, तो माशूम सा चेहरा बना कर अपनी छोटी सी ऊँगली मेरी तरफ उठाती , और कहती  ईदी ने किया , माँ – पापा हसने लगते, और मुझे गुस्सा आ जाता। ऐसा नहीं है  मैं पारुल से प्यार नहीं करती थी, बहुत प्यार करती थी, जब माँ-पापा उसे प्यार करते  तो जलन होती क्योकि मैं माँ -पापा की प्यार किसी से भी नहीं बाटना चाहती थी, पापा वकील है, मैंने बड़े हो कर उन्ही का प्रोफेसन चुना , पारुल  मुझसे भी दो कदम आगे निकल गई।

पारुल के बारे में सोचते -सोचते मैं अतीत में चली गई, मैं और मां सामान लेने मार्किट गए थे, वही मां के पास एक कॉल आया , माँ घबरा गई, तुरंत ऑटो ले कर हम हॉस्पिटल पहुंचे, माँ ने मुझे ऑटो का किराया देने को बोला और खुद भाग कर अंदर चली गई, मैं भी अंदर पहुंची तो देखा, हमारे पडोसी मेहरा अंकल और उनकी फॅमिली का बहुत भयानक एक्सीडेंट हुआ है, अंकल की डेथ वही हो गई थी , आंटी की भी आखिरी सांसे  चल रही थी, और बगल की बेंच पर बैठी उनको बेटी पारुल  को एक खरोच तक नहीं आयी थी, ऑन्टी ने   माँ को आँखों से पारुल की तरफ इशारा किया और उनके आँशु निकल आये , जैसे वह रो-रो कर कह रही हो अब मेरी बेटी का क्या होगा, आंटी भी पारुल को छोड़कर चल बसी। बेंच   पर पारुल एकदम सी सहमी बैठी थी, शायद अपनों की खोने की वजह से उसे समाज नहीं आ रहा था की क्या  करे,

अंकल -आंटी के जाने के बाद उनके कई रिश्तेदार आये , पर पारुल की जिम्मेदारी किसी ने भी लेनी नहीं चाही, तब पापा ने पारुल को गोद लेने की इच्छा माँ को बताया, माँ ने भी हां कर दी , पर मेरा  रिएक्शन क्या होगा, पता नहीं मैं मानूगी या नहीं, उन्होंने मुझेसे पूछा  मैंन उन्हें मूक स्वीकृत दे दी, हम पारुल को घर ले आये, उस दिन के बाद से मुझे पारुल की कोई बात बुरी नहीं ल गी, न ही जलन, धीरे – धीरे वह सब कुछ भूल गई, हमने भी भी उसके जन्म की सच्चाई उसको नहीं, बताई, डरते थे पता नहीं, कैसे रियेक्ट करेगी,    

एक दिन मेहरा अंकल के रिस्तेदार  आये उन्होंने पारुल को उसके जन्म की सच्चाई उसको बता दी, पारुल खूब रोइ, कई दिन लग गए उसको नार्मल होने में, लकिन उसके बाद पारुल हमारे और करीब आगई, हम उस रिस्तेदार के का दिल से शुक्रिया करते है, वरना शायद हम कैसे बताते।

मैं अतीत मैं कहि हुई थी, तभी पारुल की मीठी आवाज मेरे कानो में पड़ी, वह कह रही थी,’ दीदी सबने मुझे विश किया आपने अभी तक बधाई नहीं दी, और रोना सा फेस बना दिया, और मेरे गले में अपने दोना हाथ डाल दिए, मैंने हस्ते हुए कहा आजा मेरी नौटंकी, उसको कसकर गले से लगा  लिया।

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