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अब तो हां कर दो. Emotional Story

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रमेश को पसंद करने के बावजूद निशा ने जब शादी के लिए मना कर दिया तो एक दिन रमेश उसके घर जा पंहुचा, जहा उस के साथ एक अजीब घटना घटी।

यहाँ पास में ही एक अच्छा रेस्टोरेंट है, डिनर के लिए चले क्या, रमेश ने निशा से पुछा निशा ने बोला  मुझे घर जाना है, अरे एक दिन बहार खाना खा लोगी तो क्या हो जायेगा , रमेश ने नाटकीय अंदाज में मुँह बनाते हुए कहा,वैसे मुझ जैसा हैंडसम लड़का तुमको डेट पर ले जा रहा है , तुम भाव खा रही हो, निशा ने बोला मुझे लड़कियों के आगे -पीछे घूमने वाले लड़के बिलकुल पसंद नहीं, मुझे माफ़ करो, सिर्फ एक लड़की के पीछे घूमता हूँ  मैं, सारी उम्र उसके नखरे उठाना चाहता हूँ , बस तुम एक बार हां तो कर दो , मजाक मजाक में रमेश ने अपने दिल की बात कहदी, रमेश की आँखों में सच्चाई देखकर निशा उसे कोई करारा जवाब ने दे सकी, मेरा आज पापा के साथ डिनर का प्लान है निशा ने बस इतना ही कहा, रमेश ने बोला तो मुझे बुला लो डिनर पर वैसे भी हाथ मांगने के लिए तो मिलना ही है उनसे, निशा ने एक पेपर पर घर का एड्रेस लिख कर दे दिया, और बोली ९ बजे  पहुंच जाना, रमेश को बिलकुलअंदाजा नहीं था ऐसा कुछ होने वाला है, वह कक्का बक्का हो गया , खुद को सँभालते हुए बौला, थैंक्यू सो मच, मैं टाइम से पहुंच जाऊंगा,

निशा के घर के डोरे बेल्ल बजी, निशा ने दरवाजा खोला सामने रमेश खड़ा था जिसको देख निशा हस दी, बड़ा बन ठन के आये हो, तुम्हारे पापा को इम्प्रेस  जो करना है, रमेश ने उत्तर दिया, अच्छा ठीक है  अंदर आओ, निशा रमेश का हाथ पकड़ कर अंदर ले जाने लगी, रमेश में धीमे से कहा अब हाथ पकड़ा है तो छोड़ना मत, निशा ने उसे घूरा,

ड्राइंग रूम में ३ लोग बैठे थे, निशा ने सबसे परिचय करवाया ये ब्यूटीफुल लेडी मेरी माँ है, ये मेरे डैड है, और ये अरुण अंकल है मेरी माँ के पति, मेरे पापा और मेरी माँ का १० साल पहले तलाक हो गया था, उसके बाद मां ने अरुण अंकल से शादी करली, और ये अरुण है, रमेश ने मुझे प्रपोज़ किया है, मेरी तरफ से हां नहीं है, मैं चाहती हु आप लोग पहले मिल लो, तब तक मैं खाना लगवाती हु, इतना बोले के निशा चली गई,वहाँ बैठी तक नहीं।

रमेश निशा के पेरेंट्स के साथ बैठा था, सोच रहा था सच में वह निशा के बारे में बहुत काम जनता है, उसके  पेरेंट्स के तलाक के बारे में उसे कुछ पता ही नहीं, निशा के पापा हर तरीक से अपनी बेटी का भविष्य रमेश के  साथ कैसा होगा, जानलेना चाहते थे, बहुत सरे प्रश्न किये उन्होंने, काफी हद तक रमेश उन्हें संतुष्ट करने में सफल रहा था, निशा की मां को देख कर लग रहा था, वह रमेश से मिलकर खुश नहीं थी, अरुण अंकल बहुत काम बोल रहे थे , लकिन वह वार्तालाप में पूरी दिलचस्पी ले रहे थे, तभी निशा की आवाज आयी  खाना लग गया है।

सबने साथ में खाना खाया, उसके बाद रमेश ने सबको अलविदा कहा, और निशा को धीमे से बोला शायद तुम्हारी मम्मी का दिल नहीं जीत पाया, निशा ने कहा रमेश अरुण अंकल के साथ जाओ ये तुम्हे जहा ले जाये तुम इनके साथ जाओ, रमेश ने बिना कुछ बोले है करदी।

निशा ने रूम में जाकर माँ -पापा से पूछा कैसा लगा रमेश, पापा ने कहा मुझे अच्छा लगा पढ़ा लिखा है  अच्छी जॉब है, फॅमिली अच्छी है , मझे लगता है रमेश तुम्हारे लिए सही लड़का है, निशा ने माँ की तरफ रुख किया,माँ बोली मुझे लगता है, तुम्हे जल्दी नहीं करनी चाहिए और भी अच्छे ऑप्शन मिलेगी, निशा ने तीखे शब्दों में पुछा क्या नहीं अच्छा लगा रमेश आपको , उसकी पर्सनालिटी अच्छी नहीं है, दुबला पतला सा है, चस्मा लगाता है निशा की माँ ने उत्तर दिया , निशा के पापा ने बोला इस औरत को कभी अक्ल नहीं आएगी पहले भो लुक की दीवानी थी, अभी भी, पहले अरुण के लुक के लिए मुझसे तलाक ले लिया, अब वही  ज्ञान निशा को दे रही है, माँ कहा चुप रहने  वाली थी, तो क्या गलत है इसमें बन्दे की पर्सनालिटी तो होने चाहिए, तुम बिना मतलब मुझ पर हाथ उठाते , शक करते तब लिया तुम तलाक , और न जाने क्या क्या , दोनों एक घंटे तक लड़ते रहे। तभी निशा ने साइड का पर्दा हटाया जहा अरुण अंकल के साथ रमेश खड़ा था, जो यह नजारा देख रहा था।

अब समझ आया मैं क्यों नहीं करना चाहती शादी, निशा की यह बात सुनकर उसके पेरेंट्स ने लड़ना बंद कर दिया, सामने रमेश को देखकर

 उन्हें बहुत शर्मिन्दिगी हुई।

रमेश को भी समझ नहीं आ रहा था की क्या करे , सबकी मनोदशा समझ अरुण अंकल बोले, निशा बेटी तुमने अपने पेरेंट्स को लड़ते देखा इसलिए  तुम्हे शादी से डर लग रहा है , तुम इससे पॉजिटिव लो , और उन कमियों को दूर करो जिससे तुम्हारे पैरेंट की बीच झगडे होते थे ,और शादी को सफल बनाओ।

रमेश की तरफ रुख करते हुए बोले , क्या तुम्हे इसे खुश देख कर ख़ुशी मिलती है, क्या इसकी ख़ुशी के लिए कुछ भी करना पड़े तुम कर सकते हो, रमेश ने बोला हा अंकल जब ये खुश होती है तभी मुझे भी बहुत ख़ुशी मिलती है,

अरुण अंकल ने आगे बोला निशा की माँ और हम दोस्त थे वह अपनी पति के झगडे मुझे बताती, और मैं पूरे मन से

उनके  झगडे काम करने की कोसिस करता क्योकि हर हाल मैं उसे खुश रखना मुझे अच्छा लगता, आज भी  वह जिद्दी है, फिर भी उसकी जिद को पूरा करके उसको खुश रखना मुझे अच्छा लकता है, सभी बहुत संजीदा थे, तभी निशा के पापा की आवाज आई, अगर आज भी तेरी माँ अरुण को छोड़कर मेरे पास आये तो ख़ुशी ख़ुशी उसके  नखरे उठा लू, पापा की बात सुन कर सब हसने लगे,माहौल  खुशनुमा हो गया,

तभी रमेश नाटकीय अंदाज में घुटनो पर बैठते हुए बोले  ‘अब तो हा करदो’ सब खिलखिला कर हस दिए , निशा ने भी अपने हाथ बड़ा कर रमेश के हाथ थाम लिए हमेशा के लिए।

कल शाम को पार्टी में मिलते है रमेश ने बोला, पार्टी? कैसी पार्टी निशा ने पुछा, अरे कल ऑफिस में सबको अपनी मंगेतर से मिलवाऊंगा , तो क्या वो बिना पार्टी के मानेगे, रमेश की बात सुनकर सब जोर जोर से है पड़े।

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